श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 38: सुग्रीव का भगवान श्रीराम के चरणों में प्रणाम, सुग्रीव का अपने किये हुए सैन्य संग्रह विषयक उद्योग को बताना और उसे सुनकर श्रीराम का प्रसन्न होना  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  4.38.18-19h 
पादयो: पतितं मूर्ध्ना तमुत्थाप्य हरीश्वरम्॥ १८॥
प्रेम्णा च बहुमानाच्च राघव: परिषस्वजे।
 
 
अनुवाद
वानरराज को अपने चरणों पर सिर रखकर लेटे हुए देखकर श्री रघुनाथजी ने उन्हें हाथों से पकड़कर ऊपर उठाया और बड़े आदर और प्रेम से हृदय से लगा लिया॥18 1/2॥
 
Seeing the King of the Monkeys lying down with his head at His feet, Sri Raghunath held him with his hands and lifted him up and embraced him with great respect and love. ॥18 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)