श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 38: सुग्रीव का भगवान श्रीराम के चरणों में प्रणाम, सुग्रीव का अपने किये हुए सैन्य संग्रह विषयक उद्योग को बताना और उसे सुनकर श्रीराम का प्रसन्न होना  »  श्लोक 15-16
 
 
श्लोक  4.38.15-16 
स तं देशमनुप्राप्य श्रेष्ठं रामनिषेवितम्॥ १५॥
अवातरन्महातेजा: शिबिकाया: सलक्ष्मण:।
आसाद्य च ततो रामं कृताञ्जलिपुटोऽभवत्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
भगवान् रामजी द्वारा सेवित उस उत्तम स्थान पर पहुँचकर महाबली सुग्रीव लक्ष्मण सहित पालकी से उतर पड़े और भगवान् रामजी के पास जाकर हाथ जोड़कर खड़े हो गए ॥15-16॥
 
On reaching that excellent place served by Lord Rama, the mighty Sugreeva along with Lakshmana alighted from the palanquin and went near Lord Rama and stood with folded hands. ॥15-16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)