श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 38: सुग्रीव का भगवान श्रीराम के चरणों में प्रणाम, सुग्रीव का अपने किये हुए सैन्य संग्रह विषयक उद्योग को बताना और उसे सुनकर श्रीराम का प्रसन्न होना  »  श्लोक 12-14h
 
 
श्लोक  4.38.12-14h 
पाण्डुरेणातपत्रेण ध्रियमाणेन मूर्धनि॥ १२॥
शुक्लैश्च वालव्यजनैर्धूयमानै: समन्तत:।
शंखभेरीनिनादैश्च बन्दिभिश्चाभिनन्दित:॥ १३॥
निर्ययौ प्राप्य सुग्रीवो राज्यश्रियमनुत्तमाम्।
 
 
अनुवाद
उस समय सुग्रीव के ऊपर श्वेत छत्र रखा गया और सब ओर से श्वेत पंखे लहराए गए। शंख और तुरही की ध्वनि के साथ बंदियों का अभिवादन सुनते हुए राजा सुग्रीव परम सुंदरी राजदेवी लक्ष्मी को प्राप्त होकर किष्किन्धपुरी से बाहर निकले।
 
At that time a white umbrella was placed over Sugreeva and white fans were waved from all sides. Listening to the greetings of the prisoners along with the sound of conch and trumpet, King Sugreeva came out of Kishkindapuri after getting the most beautiful royal goddess Lakshmi. 12-13 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)