श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 38: सुग्रीव का भगवान श्रीराम के चरणों में प्रणाम, सुग्रीव का अपने किये हुए सैन्य संग्रह विषयक उद्योग को बताना और उसे सुनकर श्रीराम का प्रसन्न होना  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  4.38.10-11h 
तामुपस्थापितां दृष्ट्वा शिबिकां वानराधिप:॥ १०॥
लक्ष्मणारुह्यतां शीघ्रमिति सौमित्रिमब्रवीत्।
 
 
अनुवाद
वहाँ पालकी को उपस्थित देखकर वानरराज सुग्रीव ने सुमित्रापुत्र से कहा - 'राजा लक्ष्मण! आप शीघ्र ही इस पर आरूढ़ हो जाइये।'
 
Seeing the palanquin present there, the monkey king Sugreeva said to Sumitra's son - 'King Lakshman! You should quickly mount it.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)