vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड
»
सर्ग 38: सुग्रीव का भगवान श्रीराम के चरणों में प्रणाम, सुग्रीव का अपने किये हुए सैन्य संग्रह विषयक उद्योग को बताना और उसे सुनकर श्रीराम का प्रसन्न होना
»
श्लोक 1
श्लोक
4.38.1
प्रतिगृह्य च तत् सर्वमुपायनमुपाहृतम्।
वानरान् सान्त्वयित्वा च सर्वानेव व्यसर्जयत्॥ १॥
अनुवाद
सुग्रीव ने उनके द्वारा लाए गए समस्त उपहारों को स्वीकार करके मधुर वचनों से सब वानरों को सान्त्वना दी और फिर सबको विदा किया॥1॥
After accepting all the gifts brought by them, Sugreeva consoled all the monkeys with sweet words. Then he sent them all away.॥ 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×