श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 38: सुग्रीव का भगवान श्रीराम के चरणों में प्रणाम, सुग्रीव का अपने किये हुए सैन्य संग्रह विषयक उद्योग को बताना और उसे सुनकर श्रीराम का प्रसन्न होना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  4.38.1 
प्रतिगृह्य च तत् सर्वमुपायनमुपाहृतम्।
वानरान् सान्त्वयित्वा च सर्वानेव व्यसर्जयत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
सुग्रीव ने उनके द्वारा लाए गए समस्त उपहारों को स्वीकार करके मधुर वचनों से सब वानरों को सान्त्वना दी और फिर सबको विदा किया॥1॥
 
After accepting all the gifts brought by them, Sugreeva consoled all the monkeys with sweet words. Then he sent them all away.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)