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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड
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सर्ग 37: सुग्रीव का हनुमान् जी को वानरसेना के संग्रह के लिये दोबारा दूत भेजने की आज्ञा देना, समस्त वानरों का किष्किन्धा के लिये प्रस्थान
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श्लोक 36
श्लोक
4.37.36
सर्वे परिसृता: शैला: सरितश्च वनानि च।
पृथिव्यां वानरा: सर्वे शासनादुपयान्ति ते॥ ३६॥
अनुवाद
महाराज! हम सब पर्वतों, नदियों और वनों का भ्रमण कर चुके हैं। संसार के सभी वानर आपकी आज्ञा से यहाँ आ रहे हैं॥ 36॥
‘Maharaj! We have visited all the mountains, rivers and forests. All the monkeys of the world are coming here on your orders.’॥ 36॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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