Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.37.29: उस पर्वत पर खीर आदि अन्न (होमद्रव्य) से घी आदि स्रावित हुआ। उससे वहाँ अमृत के समान स्वादिष्ट फल और कंदमूल उत्पन्न हुए। उन वानरों ने उन फलों को देखा। | ramayan सर्ग 4.37: सुग्रीव का हनुमान् जी को वानरसेना के संग्रह के लिये दोबारा दूत भेजने की आज्ञा देना, समस्त वानरों का किष्किन्धा के लिये प्रस्थान । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अन्ननिस्यन्दजातानि मूलानि च फलानि च।
अमृतस्वादुकल्पानि ददृशुस्तत्र वानरा:॥ २९॥
अनुवाद
उस पर्वत पर खीर आदि अन्न (होमद्रव्य) से घी आदि स्रावित हुआ। उससे वहाँ अमृत के समान स्वादिष्ट फल और कंदमूल उत्पन्न हुए। उन वानरों ने उन फलों को देखा।
On that mountain, ghee etc. was secreted from the food (homamdravya) like kheer etc. From that, delicious fruits and roots like nectar grew there. Those monkeys saw those fruits.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥