श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 37: सुग्रीव का हनुमान् जी को वानरसेना के संग्रह के लिये दोबारा दूत भेजने की आज्ञा देना, समस्त वानरों का किष्किन्धा के लिये प्रस्थान  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  4.37.27 
ये तु त्वरयितुं याता वानरा: सर्ववानरान्।
ते वीरा हिमवच्छैले ददृशुस्तं महाद्रुमम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
किष्किन्धा से पुनः भेजे गए वानरों ने समस्त वानरों को शीघ्र ही वापस आने की प्रेरणा देने के लिए हिमालय पर्वत पर उस प्रसिद्ध विशाल वृक्ष को देखा (जो भगवान शंकर की यज्ञशाला में स्थित था)। 27॥
 
The monkeys who were sent again from Kishkindha to inspire all the monkeys to come back soon, saw that famous huge tree on the Himalayan Mountains (which was situated in the Yagyashala of Lord Shankar). 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)