श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 37: सुग्रीव का हनुमान् जी को वानरसेना के संग्रह के लिये दोबारा दूत भेजने की आज्ञा देना, समस्त वानरों का किष्किन्धा के लिये प्रस्थान  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  4.37.25 
क्षीरोदवेलानिलयास्तमालवनवासिन:।
नारिकेलाशनाश्चैव तेषां संख्या न विद्यते॥ २५॥
 
 
अनुवाद
क्षीरसागर के तट पर तथा तमाल वन में नारियल खाने वाले वानर इतनी बड़ी संख्या में आये कि उनकी गिनती नहीं हो सकी।
 
The monkeys living on the banks of the Kshirsagar and in the Tamal forest, eating coconuts, came in such large numbers that they could not be counted. 25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)