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ramayan 4.37.11: जो वानर विषय-भोगों में उलझे हुए हैं और जो मन्दबुद्धि हैं (जो प्रत्येक कार्य को पूरा करने में समय लगाते हैं), उन सब कपीश्वरों को शीघ्रता से यहाँ ले आओ॥11॥   |   ramayan सर्ग 4.37: सुग्रीव का हनुमान् जी को वानरसेना के संग्रह के लिये दोबारा दूत भेजने की आज्ञा देना, समस्त वानरों का किष्किन्धा के लिये प्रस्थान   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 37: सुग्रीव का हनुमान् जी को वानरसेना के संग्रह के लिये दोबारा दूत भेजने की आज्ञा देना, समस्त वानरों का किष्किन्धा के लिये प्रस्थान  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  4.37.11 
ये प्रसक्ताश्च कामेषु दीर्घसूत्राश्च वानरा:।
इहानयस्व तान् शीघ्रं सर्वानेव कपीश्वरान्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जो वानर विषय-भोगों में उलझे हुए हैं और जो मन्दबुद्धि हैं (जो प्रत्येक कार्य को पूरा करने में समय लगाते हैं), उन सब कपीश्वरों को शीघ्रता से यहाँ ले आओ॥11॥
 
Those monkeys who are entangled in sensual pleasures and who are slow (who take time to complete every task), bring all those Kapishwaras here quickly.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)