श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 37: सुग्रीव का हनुमान् जी को वानरसेना के संग्रह के लिये दोबारा दूत भेजने की आज्ञा देना, समस्त वानरों का किष्किन्धा के लिये प्रस्थान  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  4.37.1 
एवमुक्तस्तु सुग्रीवो लक्ष्मणेन महात्मना।
हनूमन्तं स्थितं पार्श्वे वचनं चेदमब्रवीत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
जब महात्मा लक्ष्मण ने ऐसा कहा, तब सुग्रीव उनके पास खड़े हनुमान जी से बोले-॥1॥
 
When Mahatma Lakshman said this, then Sugreeva spoke to Hanuman ji standing near him -॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)