Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 4.36.6: ‘राजन्! भगवान् श्री राम अपने कर्मों के कारण सर्वत्र विख्यात हैं। उनकी कृपा का अंशमात्र भी कौन बदला चुका सकता है?॥6॥   |   ramayan सर्ग 4.36: सुग्रीव का अपनी लघुता तथा श्रीराम की महत्ता बताते हए लक्ष्मण से क्षमा माँगना और लक्ष्मण का उनकी प्रशंसा करके उन्हें अपने साथ चलने के लिये कहना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 36: सुग्रीव का अपनी लघुता तथा श्रीराम की महत्ता बताते हए लक्ष्मण से क्षमा माँगना और लक्ष्मण का उनकी प्रशंसा करके उन्हें अपने साथ चलने के लिये कहना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  4.36.6 
क: शक्तस्तस्य देवस्य ख्यातस्य स्वेन कर्मणा।
तादृशं प्रतिकुर्वीत अंशेनापि नृपात्मज॥ ६॥
 
 
अनुवाद
‘राजन्! भगवान् श्री राम अपने कर्मों के कारण सर्वत्र विख्यात हैं। उनकी कृपा का अंशमात्र भी कौन बदला चुका सकता है?॥6॥
 
‘Prince! Lord Shri Ram is famous everywhere for his deeds. Who can repay his kindness even in a fraction of the amount?॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)