श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 36: सुग्रीव का अपनी लघुता तथा श्रीराम की महत्ता बताते हए लक्ष्मण से क्षमा माँगना और लक्ष्मण का उनकी प्रशंसा करके उन्हें अपने साथ चलने के लिये कहना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  4.36.3 
तत: कण्ठगतं माल्यं चित्रं बहुगुणं महत्।
चिच्छेद विमदश्चासीत् सुग्रीवो वानरेश्वर:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वानरों के राजा सुग्रीव ने अपने गले में पड़ी हुई विचित्र, विशाल और रंगबिरंगी पुष्पमाला तोड़ डाली और मद से मुक्त हो गए॥3॥
 
Thereafter Sugreeva, the King of the Monkeys, broke the strange, large and multi-coloured garland of flowers that was around his neck and became free from intoxication. ॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)