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ramayan 4.36.2: जब तारा की बात मान ली गई, तब वानरराज सुग्रीव ने लक्ष्मण से प्राप्त महान भय को गीले कपड़े की तरह त्याग दिया।   |   ramayan सर्ग 4.36: सुग्रीव का अपनी लघुता तथा श्रीराम की महत्ता बताते हए लक्ष्मण से क्षमा माँगना और लक्ष्मण का उनकी प्रशंसा करके उन्हें अपने साथ चलने के लिये कहना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 36: सुग्रीव का अपनी लघुता तथा श्रीराम की महत्ता बताते हए लक्ष्मण से क्षमा माँगना और लक्ष्मण का उनकी प्रशंसा करके उन्हें अपने साथ चलने के लिये कहना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  4.36.2 
तस्मिन् प्रतिगृहीते तु वाक्ये हरिगणेश्वर:।
लक्ष्मणात् सुमहत् त्रासं वस्त्रं क्लिन्नमिवात्यजत्॥ २॥
 
 
अनुवाद
जब तारा की बात मान ली गई, तब वानरराज सुग्रीव ने लक्ष्मण से प्राप्त महान भय को गीले कपड़े की तरह त्याग दिया।
 
When Tara's words were accepted by him, Sugreeva, the king of the monkeys, discarded the great fear he had received from Lakshmana like a wet cloth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)