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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड
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सर्ग 36: सुग्रीव का अपनी लघुता तथा श्रीराम की महत्ता बताते हए लक्ष्मण से क्षमा माँगना और लक्ष्मण का उनकी प्रशंसा करके उन्हें अपने साथ चलने के लिये कहना
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श्लोक 12
श्लोक
4.36.12
इति तस्य ब्रुवाणस्य सुग्रीवस्य महात्मन:।
अभवल्लक्ष्मण: प्रीत: प्रेम्णा चेदमुवाच ह॥ १२॥
अनुवाद
महात्मा सुग्रीव के वचन सुनकर लक्ष्मण प्रसन्न हुए और बड़े प्रेम से इस प्रकार बोले-॥12॥
Lakshmana became pleased at the words of Mahatma Sugreeva and spoke with great love as follows -॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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