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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 36: सुग्रीव का अपनी लघुता तथा श्रीराम की महत्ता बताते हए लक्ष्मण से क्षमा माँगना और लक्ष्मण का उनकी प्रशंसा करके उन्हें अपने साथ चलने के लिये कहना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  4.36.1 
इत्युक्तस्तारया वाक्यं प्रश्रितं धर्मसंहितम्।
मृदुस्वभाव: सौमित्रि: प्रतिजग्राह तद्वच:॥ १॥
 
 
अनुवाद
जब तारा ने इस प्रकार विनयपूर्वक और धर्मानुसार कहा, तब सुमित्रा के सौम्य स्वभाव वाले पुत्र लक्ष्मण ने उसे स्वीकार कर लिया (अपना क्रोध त्याग दिया)।॥1॥
 
When Tara spoke in this polite and in accordance with Dharma, then the gentle-natured son of Sumitra, Lakshmana accepted it (gave up his anger).॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)