Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 4.35.2: 'कुमार लक्ष्मण! आपको सुग्रीव से ऐसी बात नहीं कहनी चाहिए। वे वानरों के राजा हैं, अतः उनसे कटु वचन कहना उचित नहीं है। विशेषकर, वे आप जैसे मित्र से कटु वचन सुनने के अधिकारी नहीं हैं।॥ 2॥   |   ramayan सर्ग 4.35: तारा का लक्ष्मण को युक्तियुक्त वचनों द्वारा शान्त करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 35: तारा का लक्ष्मण को युक्तियुक्त वचनों द्वारा शान्त करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  4.35.2 
नैवं लक्ष्मण वक्तव्यो नायं परुषमर्हति।
हरीणामीश्वर: श्रोतुं तव वक्त्राद् विशेषत:॥ २॥
 
 
अनुवाद
'कुमार लक्ष्मण! आपको सुग्रीव से ऐसी बात नहीं कहनी चाहिए। वे वानरों के राजा हैं, अतः उनसे कटु वचन कहना उचित नहीं है। विशेषकर, वे आप जैसे मित्र से कटु वचन सुनने के अधिकारी नहीं हैं।॥ 2॥
 
‘Kumar Lakshman! You should not say such a thing to Sugreeva. He is the king of the monkeys; hence it is not proper to speak harsh words to him. Especially, he is not entitled to hear harsh words from a friend like you.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)