Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 4.32.8: ‘इस कारण मैं और भी अधिक भयभीत हूँ; क्योंकि महात्मा श्री राम ने मुझ पर जो उपकार किया है, उसका बदला चुकाने की शक्ति मुझमें नहीं है।’॥8॥   |   ramayan सर्ग 4.32: हनुमान जी का चिन्तित हुए सुग्रीव को समझाना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 32: हनुमान जी का चिन्तित हुए सुग्रीव को समझाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  4.32.8 
अतो निमित्तं त्रस्तोऽहं रामेण तु महात्मना।
यन्ममोपकृतं शक्यं प्रतिकर्तुं न तन्मया॥ ८॥
 
 
अनुवाद
‘इस कारण मैं और भी अधिक भयभीत हूँ; क्योंकि महात्मा श्री राम ने मुझ पर जो उपकार किया है, उसका बदला चुकाने की शक्ति मुझमें नहीं है।’॥8॥
 
‘This is why I am even more afraid; because I do not have the power to repay the favor that Mahatma Shri Ram has done to me.’॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)