Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.32.6: मुझे न तो लक्ष्मण का और न ही श्री रघुनाथजी का कोई भय है, परन्तु फिर भी जो मित्र मेरे बिना किसी दोष के क्रोधित हो जाता है, उससे हृदय में चिन्ता उत्पन्न होती है। | ramayan सर्ग 4.32: हनुमान जी का चिन्तित हुए सुग्रीव को समझाना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मुझे न तो लक्ष्मण का और न ही श्री रघुनाथजी का कोई भय है, परन्तु फिर भी जो मित्र मेरे बिना किसी दोष के क्रोधित हो जाता है, उससे हृदय में चिन्ता उत्पन्न होती है।
Of course I have no fear of Lakshmana or Sri Raghunathji, but even then a friend who gets angry without any fault of mine creates anxiety in the heart.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥