| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड » सर्ग 32: हनुमान जी का चिन्तित हुए सुग्रीव को समझाना » श्लोक 13 |
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| | | | श्लोक 4.32.13  | त्वं प्रमत्तो न जानीषे कालं कालविदां वर।
फुल्लसप्तच्छदश्यामा प्रवृत्ता तु शरच्छुभा॥ १३॥ | | | | | | अनुवाद | | हे वानरराज! हे काल को जानने वालों में श्रेष्ठ! इन दिनों अपनी प्रमादवश सीता की खोज के लिए जो समय निश्चित किया था, उसे तुम भूल गए हो। देखो, यह सुन्दर शरद ऋतु आरम्भ हो गई है, जो चितवन के खिले हुए फूलों के कारण श्यामवर्ण की प्रतीत हो रही है॥ 13॥ | | | | O King of the monkeys, the best amongst those who know time! You have forgotten the time you had fixed for searching Sita due to your negligence these days. Look, this beautiful autumn season has begun, which appears dark in colour due to the blooming flowers of Chitvan.॥ 13॥ | | ✨ ai-generated | | |
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