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ramayan 4.31.8: तुम कठोर वचनों को त्यागकर मधुर वाणी में सुग्रीव से केवल इतना कह दो कि सीता की खोज के लिए तुमने जो समय निर्धारित किया था, वह बीत गया (फिर तुम अब तक चुप क्यों बैठे हो)॥8॥   |   ramayan सर्ग 4.31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  4.31.8 
सामोपहितया वाचा रूक्षाणि परिवर्जयन्।
वक्तुमर्हसि सुग्रीवं व्यतीतं कालपर्यये॥ ८॥
 
 
अनुवाद
तुम कठोर वचनों को त्यागकर मधुर वाणी में सुग्रीव से केवल इतना कह दो कि सीता की खोज के लिए तुमने जो समय निर्धारित किया था, वह बीत गया (फिर तुम अब तक चुप क्यों बैठे हो)॥8॥
 
You should simply tell Sugreeva in a soothing voice, abandoning harsh words, that the time you had set for searching Sita has passed (then why are you still sitting quiet)'॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)