Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.31.7: लक्ष्मण! तुम पुण्यात्मा हो। तुम्हें सुग्रीव को इस प्रकार मारने का निश्चय नहीं करना चाहिए। उसके प्रति तुम्हारा जो प्रेम था, उसे बनाए रखो और उसके साथ जो पूर्व मैत्री थी, उसे बनाए रखो। ॥7॥ | ramayan सर्ग 4.31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
लक्ष्मण! तुम पुण्यात्मा हो। तुम्हें सुग्रीव को इस प्रकार मारने का निश्चय नहीं करना चाहिए। उसके प्रति तुम्हारा जो प्रेम था, उसे बनाए रखो और उसके साथ जो पूर्व मैत्री थी, उसे बनाए रखो। ॥7॥
Lakshmana! You are a virtuous person. You should not decide to kill Sugreeva in this manner. Follow the love you had for him and maintain the friendship you had with him earlier. ॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥