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ramayan 4.31.37: प्रचण्ड तेज वाले अंगद ने पहले अपने पिता के दोनों चरण पकड़े, फिर अपनी माता तारा के दोनों चरण छुए। तत्पश्चात उन्होंने रुमा के दोनों चरण दबाए। इसके बाद उन्होंने उपर्युक्त बात कही। 37।   |   ramayan सर्ग 4.31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  4.31.37 
संगृह्य पादौ पितुरुग्रतेजा
जग्राह मातु: पुनरेव पादौ।
पादौ रुमायाश्च निपीडयित्वा
निवेदयामास ततस्तदर्थम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
प्रचण्ड तेज वाले अंगद ने पहले अपने पिता के दोनों चरण पकड़े, फिर अपनी माता तारा के दोनों चरण छुए। तत्पश्चात उन्होंने रुमा के दोनों चरण दबाए। इसके बाद उन्होंने उपर्युक्त बात कही। 37।
 
Angada, who was of fierce brilliance, first held both the feet of his father and then touched both the feet of his mother Tara. Thereafter he pressed both the feet of Ruma. After this he said the above mentioned thing. 37.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)