Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.31.24: वे सभी वीर थे। नख और दाँत उनके शस्त्र थे। वे बड़े भयंकर दिखाई देते थे। सबके दाँत व्याघ्र के दाँतों के समान थे और सबकी आँखें खुली हुई थीं (या वे स्पष्ट दिखाई देती थीं - कोई छिपा हुआ नहीं था)।॥24॥ | ramayan सर्ग 4.31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वे सभी वीर थे। नख और दाँत उनके शस्त्र थे। वे बड़े भयंकर दिखाई देते थे। सबके दाँत व्याघ्र के दाँतों के समान थे और सबकी आँखें खुली हुई थीं (या वे स्पष्ट दिखाई देती थीं - कोई छिपा हुआ नहीं था)।॥24॥
All of them were brave. Nails and teeth were their weapons. They looked very fearsome. All of them had teeth like the teeth of tigers and all of them had open eyes (or they were clearly visible there - no one was hiding).॥24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥