श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  4.31.21 
तत: सुग्रीवभवनं प्रविश्य हरिपुंगवा:।
क्रोधमागमनं चैव लक्ष्मणस्य न्यवेदयन्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् अनेक श्रेष्ठ वानर सुग्रीव के महल में गये और उन्हें लक्ष्मण के आगमन तथा क्रोध के बारे में बताया।
 
Thereafter many great monkeys went to Sugreeva's palace and informed him about Lakshmana's arrival and anger.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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