Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 4.31.20: व्याकुल लक्ष्मण काल, मृत्यु और प्रलय की अग्नि के समान भयंकर प्रतीत हो रहे थे। उन्हें देखकर वानरों के शरीर भय से काँपने लगे और सैकड़ों वानरों ने चारों दिशाओं में पलायन कर दिया।   |   ramayan सर्ग 4.31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  4.31.20 
तं ते भयपरीताङ्गा क्षुब्धं दृष्ट्वा प्लवंगमा:।
कालमृत्युयुगान्ताभं शतशो विद्रुता दिश:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
व्याकुल लक्ष्मण काल, मृत्यु और प्रलय की अग्नि के समान भयंकर प्रतीत हो रहे थे। उन्हें देखकर वानरों के शरीर भय से काँपने लगे और सैकड़ों वानरों ने चारों दिशाओं में पलायन कर दिया।
 
The agitated Lakshmana appeared as terrifying as the fire of time, death and doomsday. Seeing him, the bodies of the monkeys began to tremble with fear and hundreds of them fled in all four directions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)