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ramayan 4.31.19: उन सबको शस्त्र धारण करते देख लक्ष्मण को दुगुना क्रोध आया, मानो जलती हुई आग में बहुत सी सूखी लकड़ियाँ डाल दी गई हों॥19॥   |   ramayan सर्ग 4.31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  4.31.19 
तान् गृहीतप्रहरणान् सर्वान् दृष्ट्वा तु लक्ष्मण:।
बभूव द्विगुणं क्रुद्धो बह्विन्धन इवानल:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
उन सबको शस्त्र धारण करते देख लक्ष्मण को दुगुना क्रोध आया, मानो जलती हुई आग में बहुत सी सूखी लकड़ियाँ डाल दी गई हों॥19॥
 
Seeing them all taking up arms, Lakshmana was doubly enraged, as if a lot of dry wood had been thrown into a burning fire.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)