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ramayan 4.31.18: उन वानरों के शरीर हाथियों के समान विशाल थे। महापुरुष लक्ष्मण को देखते ही उन सभी वानरों ने पर्वत के अंदर स्थित सैकड़ों शैल शिखरों और बड़े-बड़े वृक्षों को उठा लिया। 18.   |   ramayan सर्ग 4.31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  4.31.18 
तं दृष्ट्वा वानरा: सर्वे लक्ष्मणं पुरुषर्षभम्।
शैलशृङ्गाणि शतश: प्रवृद्धांश्च महीरुहान्।
जगृहु: कुञ्जरप्रख्या वानरा: पर्वतान्तरे॥ १८॥
 
 
अनुवाद
उन वानरों के शरीर हाथियों के समान विशाल थे। महापुरुष लक्ष्मण को देखते ही उन सभी वानरों ने पर्वत के अंदर स्थित सैकड़ों शैल शिखरों और बड़े-बड़े वृक्षों को उठा लिया। 18.
 
The bodies of those monkeys were as huge as elephants. As soon as they saw the great man Lakshman, all those monkeys lifted hundreds of rock peaks and large trees present inside the mountain. 18.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)