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ramayan 4.31.13: श्री राम की सीता की खोज की इच्छा और सुग्रीव की असावधानी से उत्पन्न विघ्न के कारण लक्ष्मण का क्रोध भी भड़क उठा। क्रोध की अग्नि से घिरे हुए लक्ष्मण सुग्रीव पर प्रसन्न नहीं हुए। वे उसी अवस्था में वायु के वेग से विचरण करने लगे॥13॥   |   ramayan सर्ग 4.31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  4.31.13 
कामक्रोधसमुत्थेन भ्रातु: क्रोधाग्निना वृत:।
प्रभञ्जन इवाप्रीत: प्रययौ लक्ष्मणस्तत:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
श्री राम की सीता की खोज की इच्छा और सुग्रीव की असावधानी से उत्पन्न विघ्न के कारण लक्ष्मण का क्रोध भी भड़क उठा। क्रोध की अग्नि से घिरे हुए लक्ष्मण सुग्रीव पर प्रसन्न नहीं हुए। वे उसी अवस्था में वायु के वेग से विचरण करने लगे॥13॥
 
Lakshmana's anger was also aroused due to Shri Ram's desire to search for Sita and the disturbance caused by Sugreeva's carelessness. Lakshmana, surrounded by the fire of anger, was not happy with Sugreeva. He moved in the same state with the speed of the wind.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)