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ramayan 4.31.12: श्री राम के छोटे भाई लक्ष्मण बृहस्पति के समान बुद्धिमान थे और अपने बड़े भाई की आज्ञा का यत्नपूर्वक पालन करते थे। उन्होंने सुग्रीव से जो कुछ कहा, सुग्रीव ने जो कुछ उत्तर दिया और सुग्रीव ने जो कुछ उत्तर दिया, उसे भली-भाँति समझकर वे वहाँ से चले गए॥12॥   |   ramayan सर्ग 4.31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  4.31.12 
यथोक्तकारी वचनमुत्तरं चैव सोत्तरम्।
बृहस्पतिसमो बुद्धॺा मत्वा रामानुजस्तदा॥ १२॥
 
 
अनुवाद
श्री राम के छोटे भाई लक्ष्मण बृहस्पति के समान बुद्धिमान थे और अपने बड़े भाई की आज्ञा का यत्नपूर्वक पालन करते थे। उन्होंने सुग्रीव से जो कुछ कहा, सुग्रीव ने जो कुछ उत्तर दिया और सुग्रीव ने जो कुछ उत्तर दिया, उसे भली-भाँति समझकर वे वहाँ से चले गए॥12॥
 
Shri Ram's younger brother Lakshmana was as wise as Brihaspati and followed his elder brother's orders diligently. Whatever he said to Sugriva, whatever reply Sugriva gave to it and whatever reply he gave to that reply, he left the place after understanding them well.॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)