Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.31.11: उस समय वह इन्द्रधनुष के समान तेजस्वी, मृत्यु और काल के समान भयंकर दिखाई दे रहा था और हाथ में पर्वत शिखर के समान विशाल धनुष लिए हुए वह सींगों सहित मंदार पर्वत के समान दिखाई दे रहा था॥11॥ | ramayan सर्ग 4.31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस समय वह इन्द्रधनुष के समान तेजस्वी, मृत्यु और काल के समान भयंकर दिखाई दे रहा था और हाथ में पर्वत शिखर के समान विशाल धनुष लिए हुए वह सींगों सहित मंदार पर्वत के समान दिखाई दे रहा था॥11॥
At that time, he appeared as radiant as the rainbow, as fearsome as death and death, and holding in his hand a bow as huge as the peak of a mountain, he appeared like Mount Mandara with its horns. ॥11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥