Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.31.1: उस समय सीता की इच्छा से परिपूर्ण, दुःखी, उदार हृदय, शोक से पीड़ित और बढ़े हुए क्रोध से युक्त श्री राम के छोटे भाई नरेन्द्रकुमार लक्ष्मण ने अपने बड़े भाई महाराज के पुत्र श्री राम से यह कहा- 1॥ | ramayan सर्ग 4.31: सुग्रीव पर लक्ष्मण का रोष, लक्ष्मण का किष्किन्धा के द्वार पर जाकर अङ्गद को सुग्रीव के पास भेजना, प्लक्ष और प्रभाव का सुग्रीव को कर्तव्य का उपदेश देना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स कामिनं दीनमदीनसत्त्वं
शोकाभिपन्नं समुदीर्णकोपम्।
नरेन्द्रसूनुर्नरदेवपुत्रं
रामानुज: पूर्वजमित्युवाच॥ १॥
अनुवाद
उस समय सीता की इच्छा से परिपूर्ण, दुःखी, उदार हृदय, शोक से पीड़ित और बढ़े हुए क्रोध से युक्त श्री राम के छोटे भाई नरेन्द्रकुमार लक्ष्मण ने अपने बड़े भाई महाराज के पुत्र श्री राम से यह कहा- 1॥
At that time, Shri Ram's younger brother Narendrakumar Lakshmana, who was full of desire for Sita, sad, generous-hearted, grief stricken and with increased anger, said this to his elder brother Maharaj's son Shri Ram - 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥