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ramayan 4.30.9: जिनके सभी अंग सुन्दर हैं और जो स्वभाव से ही मधुर वाणी बोलती हैं, वे सीता हंसों की मधुर ध्वनि सुनकर पहले ही उठ जाती थीं; परन्तु आज मेरा प्रियतम वहाँ कैसे प्रसन्न होगा?॥9॥   |   ramayan सर्ग 4.30: शरद्-ऋतु का वर्णन तथा श्रीराम का लक्ष्मण को सुग्रीव के पास जाने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 30: शरद्-ऋतु का वर्णन तथा श्रीराम का लक्ष्मण को सुग्रीव के पास जाने का आदेश देना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  4.30.9 
या पुरा कलहंसानां कलेन कलभाषिणी।
बुध्यते चारुसर्वाङ्गी साद्य मे रमते कथम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
जिनके सभी अंग सुन्दर हैं और जो स्वभाव से ही मधुर वाणी बोलती हैं, वे सीता हंसों की मधुर ध्वनि सुनकर पहले ही उठ जाती थीं; परन्तु आज मेरा प्रियतम वहाँ कैसे प्रसन्न होगा?॥9॥
 
Sita, whose all limbs are beautiful and who speaks sweetly by nature, used to wake up earlier to the sweet sound of the geese; but how would my beloved be happy there today?॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)