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ramayan 4.30.8: स्वर्ण वृक्षों के समान पवित्र और पुष्पित आसन वृक्षों को देखती हुई, जब वह मुझे अपने पास नहीं देखेगी, तब भोली सीता को कैसा लगेगा?॥8॥   |   ramayan सर्ग 4.30: शरद्-ऋतु का वर्णन तथा श्रीराम का लक्ष्मण को सुग्रीव के पास जाने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.30.8 
पुष्पितांश्चासनान् दृष्ट्वा काञ्चनानिव निर्मलान्।
कथं सा रमते बाला पश्यन्ती मामपश्यती॥ ८॥
 
 
अनुवाद
स्वर्ण वृक्षों के समान पवित्र और पुष्पित आसन वृक्षों को देखती हुई, जब वह मुझे अपने पास नहीं देखेगी, तब भोली सीता को कैसा लगेगा?॥8॥
 
How will the innocent Sita feel when she does not see me near her, looking at the Asan trees which are as pure and blooming as golden trees?॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)