Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.30.76: वीर राजकुमार! सुग्रीव मेरे पराक्रम से परिचित है, जिसके पास आप जैसा सहायक है। ऐसी स्थिति में भी यदि उसे यह चिंता न हो कि यह बालि की तरह मुझे भी मार सकता है, तो यह आश्चर्य की बात है। | ramayan सर्ग 4.30: शरद्-ऋतु का वर्णन तथा श्रीराम का लक्ष्मण को सुग्रीव के पास जाने का आदेश देना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
काममेवंगतेऽप्यस्य परिज्ञाते पराक्रमे।
त्वत्सहायस्य मे वीर न चिन्ता स्यान्नृपात्मज॥ ७६॥
अनुवाद
वीर राजकुमार! सुग्रीव मेरे पराक्रम से परिचित है, जिसके पास आप जैसा सहायक है। ऐसी स्थिति में भी यदि उसे यह चिंता न हो कि यह बालि की तरह मुझे भी मार सकता है, तो यह आश्चर्य की बात है।
Valiant prince! Sugreeva is aware of my prowess, who has a helper like you. Even in such a situation, if he is not worried that this one can kill me like Vali, then it is a matter of surprise.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥