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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 30: शरद्-ऋतु का वर्णन तथा श्रीराम का लक्ष्मण को सुग्रीव के पास जाने का आदेश देना  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  4.30.73 
कृतार्था ह्यकृतार्थानां मित्राणां न भवन्ति ये।
तान् मृतानपि क्रव्यादा: कृतघ्नान् नोपभुञ्जते॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
'जो लोग अपना स्वार्थ पूरा हो जाने पर अपने अधूरे काम वाले मित्रों की सहायता नहीं करते, उनका काम पूरा करने का प्रयास नहीं करते, उन कृतघ्न लोगों का मांस मरने पर मांसाहारी पशु भी नहीं खाते।
 
‘Those who, after their selfish interests are fulfilled, do not help their friends whose work is not complete, do not try to complete their work, even carnivorous animals do not eat the flesh of those ungrateful people when they die.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)