| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड » सर्ग 30: शरद्-ऋतु का वर्णन तथा श्रीराम का लक्ष्मण को सुग्रीव के पास जाने का आदेश देना » श्लोक 7 |
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| | | | श्लोक 4.30.7  | सारसारावसंनादै: सारसारावनादिनी।
याऽऽश्रमे रमते बाला साद्य मे रमते कथम्॥ ७॥ | | | | | | अनुवाद | | उन्होंने कहा, 'मेरी भोली-भाली पत्नी सीता, जिसका स्वर सारसों के समान मधुर था और जो मेरे आश्रम में सारसों द्वारा एक-दूसरे को बुलाने के लिए निकाली जाने वाली मधुर ध्वनि से अपना मनोरंजन करती थी, आज कैसे अपना मनोरंजन कर रही होगी?॥ 7॥ | | | | He said, 'How would my innocent wife Sita, whose voice was as sweet as the voice of cranes and who used to entertain herself with the sweet sounds made by cranes to call each other at my ashram, be entertaining herself today?॥ 7॥ | | ✨ ai-generated | | |
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