Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.30.66: 'लक्ष्मण! मैं अपने प्रियतम से वियोग में हूँ। मेरा राज्य छीन लिया गया है और मुझे देश से निकाल दिया गया है। ऐसी स्थिति में भी राजा सुग्रीव मुझ पर दया नहीं कर रहे हैं।' 66 | ramayan सर्ग 4.30: शरद्-ऋतु का वर्णन तथा श्रीराम का लक्ष्मण को सुग्रीव के पास जाने का आदेश देना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रियाविहीने दु:खार्ते हृतराज्ये विवासिते।
कृपां न कुरुते राजा सुग्रीवो मयि लक्ष्मण॥ ६६॥
अनुवाद
'लक्ष्मण! मैं अपने प्रियतम से वियोग में हूँ। मेरा राज्य छीन लिया गया है और मुझे देश से निकाल दिया गया है। ऐसी स्थिति में भी राजा सुग्रीव मुझ पर दया नहीं कर रहे हैं।' 66
‘Lakshmana! I am separated from my beloved. My kingdom has been snatched away and I have been expelled from the country. Even in this condition, King Sugriv is not showing mercy on me. 66.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥