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ramayan 4.30.64: सीताजी को न देख पाने के कारण मैं दुःखी हो गया हूँ; इसलिए वर्षा ऋतु के ये चार महीने मुझे सौ वर्षों के समान प्रतीत हो रहे हैं॥ 64॥   |   ramayan सर्ग 4.30: शरद्-ऋतु का वर्णन तथा श्रीराम का लक्ष्मण को सुग्रीव के पास जाने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.30.64 
चत्वारो वार्षिका मासा गता वर्षशतोपमा:।
मम शोकाभितप्तस्य तथा सीतामपश्यत:॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
सीताजी को न देख पाने के कारण मैं दुःखी हो गया हूँ; इसलिए वर्षा ऋतु के ये चार महीने मुझे सौ वर्षों के समान प्रतीत हो रहे हैं॥ 64॥
 
I am overcome with grief at not being able to see Sita; therefore these four months of the rainy season have seemed like a hundred years to me.॥ 64॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)