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ramayan 4.30.6: स्वर्ण धातुओं से सुसज्जित पर्वत शिखर पर बैठे हुए, श्री राम ने शरद ऋतु के स्वच्छ आकाश को देखा और चुपचाप अपनी प्रिय पत्नी सीता का ध्यान किया।   |   ramayan सर्ग 4.30: शरद्-ऋतु का वर्णन तथा श्रीराम का लक्ष्मण को सुग्रीव के पास जाने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.30.6 
आसीन: पर्वतस्याग्रे हेमधातुविभूषिते।
शारदं गगनं दृष्ट्वा जगाम मनसा प्रियाम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
स्वर्ण धातुओं से सुसज्जित पर्वत शिखर पर बैठे हुए, श्री राम ने शरद ऋतु के स्वच्छ आकाश को देखा और चुपचाप अपनी प्रिय पत्नी सीता का ध्यान किया।
 
Sitting on a mountain peak adorned with golden metals, Sri Rama gazed at the clear autumn sky and silently meditated on his beloved wife, Sita.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)