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ramayan 4.30.57: ‘अच्छी वर्षा से प्रजा को तृप्त करके, नदियों और तालाबों को जल से भरकर तथा पृथ्वी को पके हुए धान की फसलों से समृद्ध करके, बादल आकाश छोड़कर अदृश्य हो गए ॥57॥   |   ramayan सर्ग 4.30: शरद्-ऋतु का वर्णन तथा श्रीराम का लक्ष्मण को सुग्रीव के पास जाने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 30: शरद्-ऋतु का वर्णन तथा श्रीराम का लक्ष्मण को सुग्रीव के पास जाने का आदेश देना  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  4.30.57 
लोकं सुवृष्टॺा परितोषयित्वा
नदीस्तटाकानि च पूरयित्वा।
निष्पन्नसस्यां वसुधां च कृत्वा
त्यक्त्वा नभस्तोयधरा: प्रणष्टा:॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
‘अच्छी वर्षा से प्रजा को तृप्त करके, नदियों और तालाबों को जल से भरकर तथा पृथ्वी को पके हुए धान की फसलों से समृद्ध करके, बादल आकाश छोड़कर अदृश्य हो गए ॥57॥
 
‘Having satisfied the people with good rains, filled the rivers and ponds with water and enriched the earth with ripe rice crops, the clouds left the sky and disappeared. ॥ 57॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)