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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 30: शरद्-ऋतु का वर्णन तथा श्रीराम का लक्ष्मण को सुग्रीव के पास जाने का आदेश देना  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  4.30.54 
मीनोपसंदर्शितमेखलानां
नदीवधूनां गतयोऽद्य मन्दा:।
कान्तोपभुक्तालसगामिनीनां
प्रभातकालेष्विव कामिनीनाम्॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
जैसे स्त्रियाँ अपने प्रियतम के साथ रात्रि व्यतीत करके प्रातःकाल आलस्यपूर्वक चलती हैं, वैसे ही मछलियों का मेखला बाँधे हुए उन नदीरूपी वधुओं की गति भी आज धीमी हो गई है ॥ 54॥
 
Like the women who walk lazily in the morning after spending the night with their beloveds, the speed of those river-like brides, who are wearing a belt of fishes, has also slowed down today. ॥ 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)