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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 30: शरद्-ऋतु का वर्णन तथा श्रीराम का लक्ष्मण को सुग्रीव के पास जाने का आदेश देना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  4.30.53 
जलं प्रसन्नं कुसुमप्रहासं
क्रौञ्चस्वनं शालिवनं विपक्वम्।
मृदुश्च वायुर्विमलश्च चन्द्र:
शंसन्ति वर्षव्यपनीतकालम्॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
'पानी साफ हो गया है, धान की फसल पक गई है, हवा धीरे-धीरे बहने लगी है और चाँद बिल्कुल साफ दिखाई देने लगा है - ये सभी संकेत शरद ऋतु के आगमन की ओर इशारा करते हैं जिसमें वर्षा समाप्त हो जाती है, सारस चहचहाने लगते हैं और फूल उस मौसम की हंसी की तरह खिल उठते हैं।
 
‘The water has become clean, the rice crop has ripened, the wind has started blowing slowly and the moon appears very clear – all these signs indicate the arrival of the autumn season in which the rains end, the cranes start chirping and the flowers bloom like the laughter of that season.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)