Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 4.30.51: 'मंद वायु में झूमते हुए, पुष्पों के समान खिलखिलाते हुए, धुले हुए रेशमी वस्त्रों के समान चमकते हुए नदी के तट, ताजी घास से युक्त होकर अत्यंत सुन्दर दिख रहे हैं।   |   ramayan सर्ग 4.30: शरद्-ऋतु का वर्णन तथा श्रीराम का लक्ष्मण को सुग्रीव के पास जाने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 30: शरद्-ऋतु का वर्णन तथा श्रीराम का लक्ष्मण को सुग्रीव के पास जाने का आदेश देना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  4.30.51 
नवैर्नदीनां कुसुमप्रहासै-
र्व्याधूयमानैर्मृदुमारुतेन।
धौतामलक्षौमपटप्रकाशै:
कूलानि काशैरुपशोभितानि॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
'मंद वायु में झूमते हुए, पुष्पों के समान खिलखिलाते हुए, धुले हुए रेशमी वस्त्रों के समान चमकते हुए नदी के तट, ताजी घास से युक्त होकर अत्यंत सुन्दर दिख रहे हैं।
 
‘The river banks, swaying in the gentle breeze, adorned with flower-like laughter and shining like freshly washed silken clothes, are looking very beautiful with fresh grass. 51.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)