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ramayan 4.30.48: उस कुमुदिनी पुष्पों से युक्त महान् सरोवर का जल, जिसमें हंस सो रहा है, रात्रि के समय बादलों के आवरण से मुक्त, पूर्ण चन्द्रमा से सुशोभित तथा चारों ओर तारों से युक्त आकाश के समान प्रतीत होता है ॥ 48॥   |   ramayan सर्ग 4.30: शरद्-ऋतु का वर्णन तथा श्रीराम का लक्ष्मण को सुग्रीव के पास जाने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 30: शरद्-ऋतु का वर्णन तथा श्रीराम का लक्ष्मण को सुग्रीव के पास जाने का आदेश देना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  4.30.48 
सुप्तैकहंसं कुमुदैरुपेतं
महाह्रदस्थं सलिलं विभाति।
घनैर्विमुक्तं निशि पूर्णचन्द्रं
तारागणाकीर्णमिवान्तरिक्षम्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
उस कुमुदिनी पुष्पों से युक्त महान् सरोवर का जल, जिसमें हंस सो रहा है, रात्रि के समय बादलों के आवरण से मुक्त, पूर्ण चन्द्रमा से सुशोभित तथा चारों ओर तारों से युक्त आकाश के समान प्रतीत होता है ॥ 48॥
 
The water of that great pond filled with lily flowers in which a swan is sleeping, appears like the sky at night, free from the cover of clouds and adorned with the full moon, scattered with stars all around. ॥ 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)