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ramayan 4.30.32: मदमस्त हाथियों के बीच, गर्वित वृषभों के समूहों के बीच और स्वच्छ जल वाली नदियों में नाना रूपों में विभाजित लक्ष्मी अत्यंत शोभायमान हो रही हैं॥ 32॥   |   ramayan सर्ग 4.30: शरद्-ऋतु का वर्णन तथा श्रीराम का लक्ष्मण को सुग्रीव के पास जाने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.30.32 
मदप्रगल्भेषु च वारणेषु
गवां समूहेषु च दर्पितेषु।
प्रसन्नतोयासु च निम्नगासु
विभाति लक्ष्मीर्बहुधा विभक्ता॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
मदमस्त हाथियों के बीच, गर्वित वृषभों के समूहों के बीच और स्वच्छ जल वाली नदियों में नाना रूपों में विभाजित लक्ष्मी अत्यंत शोभायमान हो रही हैं॥ 32॥
 
Among the intoxicated elephants, among the groups of proud bulls and in the clear water rivers, Lakshmi divided into various forms is looking very beautiful.॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)