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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 30: शरद्-ऋतु का वर्णन तथा श्रीराम का लक्ष्मण को सुग्रीव के पास जाने का आदेश देना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  4.30.3 
कामवृत्तं च सुग्रीवं नष्टां च जनकात्मजाम्।
दृष्ट्वा कालमतीतं च मुमोह परमातुर:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने सोचा, ‘सुग्रीव काम में मग्न हो रहे हैं, जनकपुत्री सीता का कोई पता नहीं है और रावण पर आक्रमण करने का समय बीतता जा रहा है।’ यह सब देखकर भगवान राम का हृदय व्याकुल हो गया और वे चिन्ताग्रस्त हो गए॥3॥
 
He thought, 'Sugreeva is getting engrossed in lust, there is no trace of Janaka's daughter Sita and the time to attack Ravana is passing by.' Seeing all this, Lord Rama's heart became restless and he became anxious.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)