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ramayan 4.30.28: आज शरद ऋतु सप्तच्छद (छितवन) की शाखाओं में, सूर्य, चन्द्रमा और तारों की प्रभा में तथा महान हाथियों की टापों में अपनी शोभा बांटती हुई आई है॥ 28॥   |   ramayan सर्ग 4.30: शरद्-ऋतु का वर्णन तथा श्रीराम का लक्ष्मण को सुग्रीव के पास जाने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.30.28 
शाखासु सप्तच्छदपादपानां
प्रभासु तारार्कनिशाकराणाम्।
लीलासु चैवोत्तमवारणानां
श्रियं विभज्याद्य शरत्प्रवृत्ता॥ २८॥
 
 
अनुवाद
आज शरद ऋतु सप्तच्छद (छितवन) की शाखाओं में, सूर्य, चन्द्रमा और तारों की प्रभा में तथा महान हाथियों की टापों में अपनी शोभा बांटती हुई आई है॥ 28॥
 
‘Today the autumn season has come sharing its beauty in the branches of the Saptachhad (Chhitavan), in the radiance of the sun, moon and stars and in the antics of the great elephants.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)