Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 4.30.24: नील कमल की पंखुड़ियों के समान श्यामवर्णी बादल दसों दिशाओं को अंधकारमय करके बिना सिर वाले हाथियों के समान वेगहीन हो गए हैं; उनकी गति शान्त हो गई है॥ 24॥   |   ramayan सर्ग 4.30: शरद्-ऋतु का वर्णन तथा श्रीराम का लक्ष्मण को सुग्रीव के पास जाने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 30: शरद्-ऋतु का वर्णन तथा श्रीराम का लक्ष्मण को सुग्रीव के पास जाने का आदेश देना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  4.30.24 
नीलोत्पलदलश्यामा: श्यामीकृत्वा दिशो दश।
विमदा इव मातङ्गा: शान्तवेगा: पयोधरा:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
नील कमल की पंखुड़ियों के समान श्यामवर्णी बादल दसों दिशाओं को अंधकारमय करके बिना सिर वाले हाथियों के समान वेगहीन हो गए हैं; उनकी गति शान्त हो गई है॥ 24॥
 
‘The dark coloured clouds, like the petals of a blue lotus, having made all the ten directions dark, have become speedless like elephants without their head; their speed has been calmed down.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)