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ramayan 4.30.22: सुमित्रानन्दन! इस पृथ्वी को जल से संतृप्त करके तथा इसके अन्न को पकाकर अब सहस्र नेत्रों वाला इन्द्र तृप्त हो गया है॥22॥   |   ramayan सर्ग 4.30: शरद्-ऋतु का वर्णन तथा श्रीराम का लक्ष्मण को सुग्रीव के पास जाने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.30.22 
तर्पयित्वा सहस्राक्ष: सलिलेन वसुंधराम्।
निर्वर्तयित्वा सस्यानि कृतकर्मा व्यवस्थित:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
सुमित्रानन्दन! इस पृथ्वी को जल से संतृप्त करके तथा इसके अन्न को पकाकर अब सहस्र नेत्रों वाला इन्द्र तृप्त हो गया है॥22॥
 
Sumitranandan! The thousand-eyed Indra has now become gratified by saturating this earth with water and cooking its grains. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)